शनिवार, 26 दिसंबर 2009

कविता टुकड़ों में - 2


    कविता टुकड़ों में 2

1.      आस्था विवेक और सफलता
      हर लाश की छाती पर मौजूद है
       और पीठ पर
      बदनुमा धब्बे हैं
    मूर्खता कायरता और नीचता के
    प्रतीक सी है हर लाश
    आशंका और आकांक्षा की.



2.  निराशा की काली कोठरी में
    एक छोटे से रोशनदान जैसी
    आकांक्षा
    और
    हर सुबह सूरज उगने के पहले
    उसके बंद हो जाने की
    आशंका.
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